
महाप्रभु के अनन्य साधक श्री जगदीश दास बाबाजी: करुणा, विनम्रता और अखंड वैष्णव साधना की अमर गाथा
तिरोभाव उत्सव विशेष : श्री बाबा महाराज कहते थे कि याद रखो जीव की आध्यात्मिक प्रगति रातों-रात नहीं होती। आत्मा धीरे-धीरे, एक-एक कदम करके आगे बढ़ती है।

तिरोभाव उत्सव विशेष : श्री बाबा महाराज कहते थे कि याद रखो जीव की आध्यात्मिक प्रगति रातों-रात नहीं होती। आत्मा धीरे-धीरे, एक-एक कदम करके आगे बढ़ती है।

श्री चैतन्य महाप्रभु के पुरी आने से पहले, गुंडीचा मंदिर की सफाई जगन्नाथ मंदिर प्रशासन, राजा के सेवकों और स्थानीय सफाई कर्मचारियों द्वारा की जाती थी। श्री चैतन्य महाप्रभु पुरी आए, तो उन्होंने इस साधारण सफाई कार्य को 'महा-मार्जन लीला' का रूप दे दिया।

अंकित जी को एक अत्यंत सम्मानित और बौद्धिक परिवेश विरासत में मिला है। देश और दुनिया की कई शीर्ष और बहुराष्ट्रीय (MNC) फार्मास्युटिकल कंपनियों और कॉर्पोरेट की ऊंचाइयों को छोड़कर अंकित जी का 'खबर4इंडिया' से जुड़ना कोई संयोग नहीं.....

अनवसर के 15 दिनों में उनकी मूर्तियों की मरम्मत, लेपन और नया श्रृंगार पूरी तरह से 'दइतापति' सेवकों द्वारा अत्यंत गोपनीयता के साथ किया जाता है, जो खुद को भगवान का वंशज मानते हैं।