
ब्रज के अनन्य महायोद्धा और कृष्ण-हृदय: श्री श्रीदामा सखा की दिव्य गाथा
भांडीरवन में जब सखा कुश्ती लड़ते थे, तो श्रीदामा अक्सर श्री कृष्ण को पराजित कर देते थे। हारने के बाद भगवान कृष्ण को श्रीदामा को अपने कंधों पर बिठाकर घुमाना पड़ता था।

भांडीरवन में जब सखा कुश्ती लड़ते थे, तो श्रीदामा अक्सर श्री कृष्ण को पराजित कर देते थे। हारने के बाद भगवान कृष्ण को श्रीदामा को अपने कंधों पर बिठाकर घुमाना पड़ता था।

मधुमंगल कहते, "देख कान्हा, मैं ब्राह्मण हूँ, मुझे तंग मत कर वरना मैं तुझे श्राप दे दूँगा!" और कृष्ण हँसते हुए उनके चरणों की धूल सिर पर लगा लेते थे।

तुंगविद्या जी का शारीरिक वर्ण (रंग) कुंकुम (लाल केसरिया) और चन्दन के मिश्रण के समान कांतिमान है। उनकी आभा सूर्य की किरणों जैसी प्रखर और शीतल है। वे 'पांडु' (हल्के पीले या क्रीम) रंग के अत्यंत महीन और सुंदर वस्त्र धारण करती हैं।

चित्रलेखा जी का शारीरिक वर्ण (रंग) 'केसर' के समान पीला और कांतिमान है। वे 'कांचन' (स्वर्ण) के समान चमकते हुए वस्त्र धारण करती हैं, जो उनके कलात्मक व्यक्तित्व को और भी निखारता है।