
श्री हित उत्सव: भक्ति और प्रेम का महाकुंभ, नित्य विहार का विशुद्ध प्रेम
हित उत्सव, श्री हित हरिवंश महाप्रभु के आदर्शों, उनकी वाणी और उनके द्वारा स्थापित 'राधावल्लभ' तत्व की महिमा का गान करने का पर्व है।

हित उत्सव, श्री हित हरिवंश महाप्रभु के आदर्शों, उनकी वाणी और उनके द्वारा स्थापित 'राधावल्लभ' तत्व की महिमा का गान करने का पर्व है।

तोक जी उन भाग्यशाली सखाओं में से थे, जिन्होंने यमुना किनारे 'वन-भोजन' के समय कृष्ण के साथ एक ही थाली में भोजन किया।

जब कृष्ण यमुना के काली दह में कूद गए, तो मनसुखा जी किनारे पर खड़े होकर हाहाकार करने लगे। 'गर्ग संहिता' के अनुसार, वे यमुना में कूदने ही वाले थे कि बलराम जी ने उन्हें रोका।

'श्रीमद्भागवत' के भावार्थ टीकाओं में उल्लेख है कि तनसुखा जी कृष्ण के बिना एक पल भी जीवित रहने की कल्पना नहीं कर सकते थे।