
टेर कदम्ब जहां विरह के पद सुनते ही सूख जाते थे पेड़ के पत्ते!
ब्रज मंडल के पावन धाम नंदगांव में स्थित श्री टेर कदम्ब केवल एक स्थल नहीं, बल्कि साक्षात द्वापरयुग की दिव्य लीलाओं का जीवंत केंद्र है।

ब्रज मंडल के पावन धाम नंदगांव में स्थित श्री टेर कदम्ब केवल एक स्थल नहीं, बल्कि साक्षात द्वापरयुग की दिव्य लीलाओं का जीवंत केंद्र है।

राजा सवाई जयसिंह की सभा में मात्रा 10 वर्ष की आयु में श्री वंशी अली जी ने अपनी विद्वत्ता का ऐसा परिचय दिया कि राजा जयसिंह ने इन्हें अपने गुरु-तुल्य स्थान दिया

भगवान शिव जिस स्थान पर बैठकर दर्शन की 'आशा' में प्रतीक्षा कर रहे थे, उसी स्थान को आशेश्वर कहा गया।

सीधे ब्रज के आंतरिक क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए ब्रिटिश पी.डब्ल्यू.डी. (PWD) और तत्कालीन रेल नेटवर्क के समन्वय से इस मीटर-गेज लाइन का विस्तार किया गया था।