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प्राणाधार बाबा श्री श्याम दास जी महाराज (संकेत वट, बरसाना) – भाग 1
·वर्तमान संत भक्तमाल·By प्रमोद कुमार शुक्ला

प्राणाधार बाबा श्री श्याम दास जी महाराज (संकेत वट, बरसाना) – भाग 1

कोट-पेंट, हाथ में बंधी कीमती घड़ी और अपनी सामाजिक वेशभूषा में ही वे तत्काल वृंदावन की ओर दौड़ पड़े। वृंदावन पहुँचकर उन्होंने अपनी पुरानी पहचान को त्याग दिया और धोती-माला

प्राणाधार बाबा श्री श्याम दास जी महाराज – भाग 2 (गुरु मिलन और साधना)
·वर्तमान संत भक्तमाल·By प्रमोद कुमार शुक्ला

प्राणाधार बाबा श्री श्याम दास जी महाराज – भाग 2 (गुरु मिलन और साधना)

कुछ साधुओं की सहायता से वे बाबा तक पहुँचे और दीक्षा की याचना की, परंतु विष्णु दास बाबा महाराज ने स्पष्ट मना कर दिया। वे अत्यंत विरक्त संत थे

श्री प्रबोधानंद सरस्वती : वृंदावन महिमामृत के दाता  संगीत एवं वैराग्य के शिखर
·गौड़िया वैष्णव आचार्य·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री प्रबोधानंद सरस्वती : वृंदावन महिमामृत के दाता संगीत एवं वैराग्य के शिखर

पहले प्रबोधानंद जी तर्क करते थे कि ब्रह्म निराकार है, लेकिन महाप्रभु के सानिध्य में उन्हें अनुभव हुआ कि सगुण साकार 'कृष्ण' ही परम सत्य हैं। महाप्रभु की कृपा से उनका 'मायावाद' का अहंकार ढह गया और वे पूरी तरह कृष्ण-प्रेमी बन गए।

वृंदावन के प्रथम पथ-प्रदर्शक: राधा विनोद के प्यारे श्री लोकनाथ गोस्वामी की अनकही गाथा
·गौड़िया वैष्णव आचार्य·By प्रमोद कुमार शुक्ला

वृंदावन के प्रथम पथ-प्रदर्शक: राधा विनोद के प्यारे श्री लोकनाथ गोस्वामी की अनकही गाथा

जब चैतन्य महाप्रभु ने नवद्वीप में संकीर्तन आंदोलन शुरू किया, तब लोकनाथ जी उनके मुख्य पार्षदों में से एक बन गए। लेकिन जब महाप्रभु ने सन्यास लेने का निश्चय किया, तो लोकनाथ जी का हृदय वियोग की आशंका से भर गया।

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