
भक्ति और स्थापत्य का संगम: जयपुर का श्री राधा गोविंद देव मंदिर
पहले इन्हें आमेर के कनक वृंदावन में रखा गया और बाद में सिटी पैलेस के 'चंद्र महल' के ठीक सामने स्थापित किया गया, ताकि राजा अपने महल की खिड़की से सीधे भगवान के दर्शन कर सकें।

पहले इन्हें आमेर के कनक वृंदावन में रखा गया और बाद में सिटी पैलेस के 'चंद्र महल' के ठीक सामने स्थापित किया गया, ताकि राजा अपने महल की खिड़की से सीधे भगवान के दर्शन कर सकें।

इतिहास कहता है कि करौली के महाराजा गोपाल सिंह जी की रानी, जो जयपुर की राजकुमारी थीं, मदन मोहन जी की अनन्य भक्त थीं। उनकी जिद और भक्ति के वशीभूत होकर, अंततः संवत 1705 के आसपास इन विग्रहों को करौली

भक्तों का विश्वास है कि श्री गोपीनाथ जी के दर्शन करने से भगवान के वक्षस्थल (हृदय) के दर्शन का फल प्राप्त होता है। यहाँ राधा जी के साथ ललिता सखी और विशाखा सखी की भी पूजा की जाती है

आज हम आपको मिलाएंगे कवि अविनाश श्रीवास्तव जी से उनकी कलम में एक जादुई स्पर्श है, जो ठाकुर श्री राधारमण जी......