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परम भागवत श्री शुकदेव जी महाराज: परमज्ञान से परमभक्ति की दिव्य यात्रा
·Saints·By प्रमोद कुमार शुक्ला

परम भागवत श्री शुकदेव जी महाराज: परमज्ञान से परमभक्ति की दिव्य यात्रा

परंतु भक्ति मार्ग के आचार्यों (जैसे श्री रूप गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी और श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर) का मानना है कि शुकदेव जी का अद्वैत ज्ञान और निर्गुण समाधि केवल उनकी भक्ति की पृष्ठभूमि (Background) थी।

महर्षि अगस्त्य: भक्ति, ज्ञान और तपस्या का अनुपम शिखर
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

महर्षि अगस्त्य: भक्ति, ज्ञान और तपस्या का अनुपम शिखर

महर्षि अगस्त्य का चरित्र केवल ज्ञानी या सिद्ध पुरुष का नहीं है, बल्कि एक अनन्य भक्त का है। शास्त्रों में भक्ति के कई प्रकार बताए गए हैं—नवधा भक्ति, निष्काम भक्ति, और अनन्य भक्ति। महर्षि अगस्त्य की भक्ति में यह सभी रूप समाहित हैं।

देवर्षि नारद: भक्ति-शिरोमणि एवं भगवन्नाम के शाश्वत प्रचारक
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

देवर्षि नारद: भक्ति-शिरोमणि एवं भगवन्नाम के शाश्वत प्रचारक

नारदजी अपने पूर्वजन्म में एक अत्यंत साधारण शूद्रा दासी के पुत्र थे। परंतु, सत्संग के प्रभाव से उनका जीवन पूर्णतः बदल गया। संतों के भोजन के पश्चात बचे हुए प्रसाद को ग्रहण किया, जिससे उनके जन्मांतर के पाप नष्ट हो गए और चित्त शुद्ध हो गया।

राम ते अधिक राम कर दासा': महर्षि वाल्मीकि का अद्वितीय भक्त चरित्र और उनकी पावन लीलाएं
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

राम ते अधिक राम कर दासा': महर्षि वाल्मीकि का अद्वितीय भक्त चरित्र और उनकी पावन लीलाएं

महर्षि वाल्मीकि 'रत्नगिरि' या 'रत्नाकर' के नाम से जाने जाते थे। वे अपने कुटुंब के भरण-पोषण के लिए तमसा नदी के बीहड़ वनों में राहगीरों को लूटने और हिंसा का कार्य करते थे। उनके जीवन में न तो धर्म का ज्ञान था और न ही भक्ति का आस्वादन।

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