
राधा रमण जी के 12 भाई व प्रकटीकरण लीला
गोपाल भट्ट गोस्वामी अपने साथ लाए गए शालिग्रामों की नित्य सेवा करते थे। संवत 1599 (1542 ईस्वी) के आसपास की बात है, वृन्दावन में एक धनी भक्त आए जिन्होंने सभी विग्रहों के लिए सुंदर वस्त्र और आभूषण दान किए।

गोपाल भट्ट गोस्वामी अपने साथ लाए गए शालिग्रामों की नित्य सेवा करते थे। संवत 1599 (1542 ईस्वी) के आसपास की बात है, वृन्दावन में एक धनी भक्त आए जिन्होंने सभी विग्रहों के लिए सुंदर वस्त्र और आभूषण दान किए।

वृषभ जी अक्सर बलराम जी के साथ प्रतिस्पर्धा करते थे। वे इतने बलशाली थे कि कई बार वे बलराम जी को कड़ी चुनौती देते थे

यद्यपि पर्वत श्री कृष्ण की छोटी उंगली पर था, किंतु विशाल जी का 'प्रेम' ऐसा था कि वे अपनी पूरी शक्ति लगा रहे थे ताकि उनके प्रिय कन्हैया को कष्ट न हो।

गौड़ीय वैष्णव दर्शन में 'सुबल-मिलन' का विशेष महत्व है। सुबल जी का चरित्र यह सिखाता है कि भगवान की प्राप्ति के लिए कभी-कभी अपनी पहचान भी खोनी पड़ती है।