
जब कान्हा के दर्शन की आशा में कैलाश छोड़ ब्रज आ बैठे महादेव जानिए आशेश्वर मंदिर का अनोखा इतिहास
भगवान शिव जिस स्थान पर बैठकर दर्शन की 'आशा' में प्रतीक्षा कर रहे थे, उसी स्थान को आशेश्वर कहा गया।

भगवान शिव जिस स्थान पर बैठकर दर्शन की 'आशा' में प्रतीक्षा कर रहे थे, उसी स्थान को आशेश्वर कहा गया।

सीधे ब्रज के आंतरिक क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए ब्रिटिश पी.डब्ल्यू.डी. (PWD) और तत्कालीन रेल नेटवर्क के समन्वय से इस मीटर-गेज लाइन का विस्तार किया गया था।

ब्रह्मगिरी और विष्णुगिरी पहाड़ियों के बीच की जो ढलान वाली घाटी है, वह घने वृक्षों, लताओं और प्राचीन कुंजों से ढकी हुई है। इसे 'गहवर वन' कहा जाता है।

इस युद्ध में सैकड़ों ब्रजवासी और सैनिक मंदिर की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। यद्यपि अफ़गानों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए नीचे की बस्तियों में आग लगा दी...