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 सृष्टि के रचयिता ही नहीं, भगवद्-भक्ति के भी परम मुकुटमणि हैं पितामह ब्रह्मा
·Bhatkmal·By आशुतोष दास (अंकित जुनेजा)

सृष्टि के रचयिता ही नहीं, भगवद्-भक्ति के भी परम मुकुटमणि हैं पितामह ब्रह्मा

ब्रह्मा जी 'आचार्य' और 'भक्त' की भूमिका में हैं। एक सच्चा भक्त कभी यह नहीं चाहता कि भगवान को छोड़कर उसकी स्वयं की पूजा हो। ब्रह्मा जी ने स्वयं भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रचार किया। वे जीवों को अपनी ओर आकर्षित करने के बजाय सीधे 'हरि-चरणों' की ओर भेजते हैं।

आज भी मजार पर क्यों रुकता है जगन्नाथ जी का रथ पढ़ें भक्त सालबेग की अमर कथा
·Bhatkmal·By आशुतोष दास (अंकित जुनेजा)

आज भी मजार पर क्यों रुकता है जगन्नाथ जी का रथ पढ़ें भक्त सालबेग की अमर कथा

सालबेग का पालन-पोषण एक मुस्लिम माहौल में हुआ, लेकिन उनकी माता के मन में छिपी हिंदू धार्मिक चेतना ने उनके अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डाला। ओड़िशा के प्रसिद्ध इतिहासकार और शोधकर्ता डॉ. के.सी. पाणिग्रही....

भक्तराज शिव जब बने अपने ही भक्तों के दास
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्तराज शिव जब बने अपने ही भक्तों के दास

भगवान शिव काल के भी काल 'महाकाल' बनकर शिवलिंग से प्रकट हो गए और यमराज को परास्त कर मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। भक्त की रक्षा के लिए मृत्यु के नियम को बदल देना शिव के भक्त-प्रेमी स्वभाव को दर्शाता है।

रिद्धि सिद्धि के स्वामी होकर भी त्यागी व भक्तों में श्रेष्ठ है भगवान गणेश
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

रिद्धि सिद्धि के स्वामी होकर भी त्यागी व भक्तों में श्रेष्ठ है भगवान गणेश

प्रायः देखा जाता है कि जब किसी साधक या संत को सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं, तो उसमें अहंकार प्रवेश कर जाता है। परंतु श्री गणेश ....

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