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श्री नंद प्रेक्षण वन: जहाँ नंद बाबा की आँखों के तारे बने थे नंदनंदन, आज भी जीवंत है वात्सल्य की वह छाँव
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री नंद प्रेक्षण वन: जहाँ नंद बाबा की आँखों के तारे बने थे नंदनंदन, आज भी जीवंत है वात्सल्य की वह छाँव

"नन्दप्रेक्षणकं नाम वनं पापप्रणाशनम्। दृष्ट्वा नन्दपदम तत्र मुच्यते सर्वपातकैः॥" (नंद प्रेक्षण नाम का यह वन पापों का नाश करने वाला है। यहाँ नंद बाबा के पदचिन्हों और उनकी वात्सल्य स्थली के दर्शन से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।)

श्री अंजन वन: आजनौख जहाँ श्यामसुंदर ने स्वयं अपने हाथों से श्रीजी के लगाया था काजल
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री अंजन वन: आजनौख जहाँ श्यामसुंदर ने स्वयं अपने हाथों से श्रीजी के लगाया था काजल

वराह पुराण के 'मथुरा महात्म्य' में भगवान वराह पृथ्वी देवी को संबोधित करते हुए कहते हैं: "अंजनं नाम तद्वनं सर्वसौभाग्यवर्धनम्। तत्र स्नात्वा नरो देवि मम रूपमवाप्नुयात्॥"

श्री कदमखंडी वन: जहाँ आज भी गूँजती है श्यामसुंदर की मुरली और संतों का मौन तप
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री कदमखंडी वन: जहाँ आज भी गूँजती है श्यामसुंदर की मुरली और संतों का मौन तप

यह वन 'संकेत' के निकट होने के कारण युगल सरकार के गुप्त मिलन का भी साक्षी है। यहाँ की प्रत्येक लता को सखियों का स्वरूप माना जाता है।

श्री प्रमदरा वन: जहाँ आज भी गूँजती है ठाकुर जी के आनंद की मुरली
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री प्रमदरा वन: जहाँ आज भी गूँजती है ठाकुर जी के आनंद की मुरली

"प्रमदं नाम तद्वनं सर्वपापप्रणाशनम्। तत्र गत्वा नरो देवि मम लोके महीयते॥" (हे देवि! प्रमद नाम का वह वन सभी पापों का नाश करने वाला है। वहाँ जाने वाला मनुष्य मेरे लोक को प्राप्त करता है।)

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