नवोदित भाव : कवि अविनाश श्रीवास्तव के कलम से राधारमण जी के प्रकट उत्सव पर जादुई कविता

आज हम आपको मिलाएंगे कवि अविनाश श्रीवास्तव जी से उनकी कलम में एक जादुई स्पर्श है, जो ठाकुर श्री राधारमण जी......
khabar4india.com का अनुभाग/सेक्सन "नवोदित भाव" एक ऐसा मंच है जो धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर केंद्रित है। हमारा उद्देश्य धर्म और अध्यात्म के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है, और इसमें हम नए लेखकों, कवियों और शायरों की मदद से उनकी रचनात्मकता को एक मंच प्रदान करना चाहते हैं। हमारे इस नए सेक्सन में, हम आपको उन प्रतिभाशाली लोगों से मिलवाएंगे जो अपनी कलम से धर्म और अध्यात्म की दुनिया को और भी समृद्ध बना रहे हैं। यहां आपको उनकी कविताएं, लेख, और शायरी पढ़ने को मिलेगी, जो आपको धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से प्रेरित करेंगी।
आज की प्रस्तुति
आज हम आपको मिलाएंगे कवि अविनाश श्रीवास्तव जी से, जो रसायन विज्ञान के शोधकर्ता है मगध विश्वविद्यालय बोधगया बिहार उन्होंने आज हमें वृंदावन के ठाकुर श्री राधारमण जी के प्रकट उत्सव पर कविता भेजी है उनकी कलम में एक जादुई स्पर्श है, जो धार्मिक भावनाओं को जागृत करती हैं हैं। हम उनकी इस रचना को आपके साथ साझा करते हुए बहुत खुशी महसूस कर रहे हैं। और उनके इस अतुल्य योगदान के लिए उनकी सराहना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप भी उनकी कलम के जादू में खो जाएंगे:-
वृंदावन धाम में आज सजीआनंदित हर एक डगर,
राधा-रसिक श्री रमण लला पर, बरसे प्रेम सुधा निर्झर।
मंगल ध्वनि में गूँज रहा है, जय-जयकार अपार आज,
प्रकट हुए श्री राधारमण, मिटा सकल भव-भय का राज।
मोर मुकुट सिर, अधरों वंशी, नयनों में मधुरिम मुस्कान,
दर्शन पाकर पुलकित होती, भू, गगन, वन, यमुना, ब्रजधान।
राधा संग रमते हर क्षण जो, प्रेम सुधा के सागर हैं,
भक्त हृदय के कण-कण वासी, दीनन हित उजागर हैं।
फूलों की वर्षा हो रही, मंदिर में छाई छवि न्यारी
घंटा, शंख, मृदंग बजत हैं, नाचे ब्रज की नर-नारी।
जिसने देखा रूप सलोना, तज दिया जग का अभिमान,
राधारमण की कृपा पाकर, बन जाता जीवन महान।
आज प्रकट उत्सव के शुभ दिन, विनती मेरी स्वीकारो,
भक्ति भाव से रिक्त हृदय में, प्रेम दीप फिर से धारो।
श्री वृंदावन बिहारी मोहन, कर दो जीवन धन्य हमारा,
जय जय श्री राधारमण प्रभु, जय जय नंदकिशोर दुलारा
यह था कवि अविनाश श्रीवास्तव महाराजगंज द्वारा भेजा गया भक्ति रस से सराबोर श्री राधारमण के प्रति "नवोदित भाव"
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