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सुल्तानपुर- K N I P C S मे रिसर्च एप्रोवेज की सात दिवसीय कार्यशाला का आज चौथा दिन

सुल्तानपुर

 

*रिसर्च एप्रोचेज एंड डिजिटल लर्निंग टूल्स विषय पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का चौथा दिन आज*

 

*कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान सुल्तानपुर द्वारा आयोजित कार्यशाला का हुआ सजीव प्रसारण*

 

*देश के जाने माने कई विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स ने लिया हिस्सा, लोगों की जिज्ञासाओं का दिया जवाब*

 

आज दिनांक 18.07.2020

कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान, सुलतानपुर “रिसर्च एप्रोचेज,

एण्ड डिजिटल लर्निंग टूल्स विषय पर सप्त दिवसीय अन्तर्विषयक कार्यशाला के चौथे दिन प्रातः 10 कार्यक्रम का सजीव प्रसारण हुआ। शासन द्वारा निर्धारित वर्क फ्रोम होम की धारणा को दृष्टिगत रखते हुए कार्यक्रम का संचालन डॉ विजय प्रताप सिंह, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी एवं कार्यशाला संयोजक ने विद्वान वक्ताओं एवम् प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

प्रातःकालीन सत्र में प्रो एम एस पांडेय बीएचयू, पद्मश्री प्रो आर सी सोब्ती चंडीगढ, तथा प्रो भूपेन्द्र विक्रम सिंह बीएचयू ने कार्यशाला को संबोधित किया।

सत्र के प्रथम अतिथि वक्ता बी एच यू के अँग्रेजी के विद्वान प्रो एम एस पांडेय ने कल्चरल स्टडीज की रिसर्च तकनीक पर व्याख्यान दिया। कल्चर को जनअभिव्यक्ति तथा मास कल्चर को आरोपित बताते हुए फैशन, फिल्म, मीडिया, ग्राफिटी आदि कल्चरल आर्टिफैक्ट पर शोध की एप्रोच से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

 

प्रोफेसर आर सी सोबती जी, चंडीगढ़ ने अपने व्याख्यान में संस्थान में आयोजित कार्यशाला के शीर्षक को आज के समय में बहुत प्रासंगिक बताया क्योंकि जब तक आप अच्छा नहीं पढ़ा सकते जब तक आप की अप्रोच बहुआयामी नहीं होगी। विज्ञान को आप बेहतर पढ़ा सकते हैं यदि आप सामाजिक विज्ञान को भी समझते हैं। आपने इस बात पर जोर दिया कि आप विज्ञान और संस्कृति को अलग नहीं कर सकते। भारतीय संस्कृति एक विज्ञान है, कोविड 19 के दौर में वेस्टर्न कल्चर भी आयुर्वेद के नाते हमारी तरफ आ रहा है। नमस्ते का,धर्मो का, संस्कृतियों का अपनी वैज्ञानिक धारणा है। कोविद 19 के समय आपने डार्विन के सिद्धांत का जिक्र करते हुए अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने को कहा। इस समय सभी को स्वाध्याय पर जोर देना चाहिए, अपनी गलतियों को न दुहराएं और सोचें कि आगे से ऐसा नहीं करेंगे। हमारा जन्म सेवा के लिए हुआ है इसलिए प्रकृति के रूप में पंच तत्वों की सेवा कीजिए। आपने इस बात पर जोर दिया कि हमें वापस भारतीय संस्कृति में जाना होगा, भारतीय संस्कृति को तकनीक से जोड़ते हुए उन्होने परामर्श दिया कि बच्चों को बहुआयमी शिक्षा देनी होगी।

प्रोफेसर भूपिंदर सिंह, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस ने मुख्य वक्ता के रूप में रिसर्च मेथाडॉलजी पर अपने विचार रखे। आपके अनुसार रिसर्च वैज्ञानिक शोच का समय है, सत्य जानने का प्रयास है। आप ने बताया कि 1950 तक का दौर साइनटेशिम का था और उसके बाद पॉजिटिव स्ट मैथड का समय आया। तकनीक के वजह से मेथड्स बदल रहे हैं, Positivist रिसर्च के तत्व – बॉडी एवम् माइंड, वैल्यूज,तर्क संगत सोच आदि हैं। रिसर्च की फ्रेमिंग, समस्या, परिकल्पना पर आपने प्रतिभागियों को विस्तार से बताया , सैंपल से सार्वभौमिक सत्य को जानने के तरीके बताए। एक विश्वास होता है उस के लिए ही विश्लेषण करते हैं।जो सत्य है वह दो प्रकार का है यदि व्यक्तिगत गुणों से संबंधित है तो मीन, मेडियन एवम् मोड का प्रयोग करेंगे, यदि सत्य संबंधनात्मक है तो एनालिसिस ऑफ वेरिएंशन्स, रिग्रेशन का प्रयोग करेंगे। आपने विश्लेषण हेतु पैरामेट्रिक एवम् नान पैरामेट्रिक तकनीक के साथ साथ डाटा के प्रकार, प्रश्नावली कैसे डेवलप करनी है, के बारे में बताया।

 

कार्यशाला के दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में

प्रोफेसर अरविंद सिंह, जन्तु विज्ञान विभाग, बी एच यू, वाराणसी ने प्रतिभागियों को स्टेटिस्टिक्स टूल – एनालिसिस ऑफ वेरियांस के बारे में कैसे अपने शोध कार्य में प्रयोग करना है, के बारे में सिखाया। इस के उपरांत श्री आशीष श्रीवास्तव , टेक्नोलॉजी सेंटर, के ऐन आई, सुल्तानपुर ने प्रतिभागियों को कंप्यूटर सिस्टम पर माइक्रोसॉफ्ट एसेस के बारे में सिखाया जिससे वह सभी डाटा प्रबंधन एवम् डाटा हैंडलिंग सीख सकें।

 

प्रतिभागियों को व्याख्यान पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न दिए गए जिन्हें शाम को हल करते हुए सबमिट करना अनिवार्य है।

सत्र के अंत में डॉ रामनयन सिंह, कार्यशाला आयोजन सचिव ने रिसोर्स पर्सन और प्रतिभागीयों का धन्यवाद् ज्ञापन किया। कार्यशाला में सक्रिय रूप से संस्थान प्राचार्य डॉ राधेश्याम सिंह, उपप्राचार्य डॉ सुशील कुमार सिंह, डॉ आर पी सिंह, डॉ जय शंकर शुक्ल, डॉ ऐ के सिंह, डॉ बिहारी सिंह, डॉ डी के त्रिपाठी, डॉ आर के पांडेय, डॉ किरन सिंह, डॉ सुनील प्रताप सिंह, डॉ प्रवीण कुमार सिंह, डॉ वीरेंद्र श्रीवास्तव, डॉ अवधेश दुबे के साथ श्री संजय पांडेय व दीप बरनवाल उपस्थित थे।

डाँ.प्रवीण सिंह

कार्यशाला रिपोर्टर

के.एन.आई.पी.एस.एस,सुलतानपुर।

श्याम जी त्रिपाठी 'रामजाने'
श्याम जी त्रिपाठी 'रामजाने'http://www.khabar4india.com
श्याम जी त्रिपाठी 'रामजाने' खबर4इंडिया के सुल्तानपुर जनपद के एडिशनल ब्यूरो चीफ हैं। आपके पास एक दशक से ज्यादा का अनुभव पत्रकारिता के क्षेत्र में है। आप बेखौफ और जनसरोकारिता से जुड़ी पत्रकारिता करते हैं। समाचार से जुड़े शिकायत एवं सुझाव हेतु 9990486338 पर संपर्क करें।

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