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क्राइम फाइल: सुशील मिश्रा का अपहरण, 8 साल बाद भी प्रतापगढ़ की पुलिस खाली हाथ !

प्रतापगढ़ (टीम खबर4इंडिया): अक्सर पुलिस पर आरोप लगते हैं खासकर नाकामी के और आरोपियों का साथ देने का। हम भी इस बात से इत्तफाक ही रखते हैं। लेकिन जब सारे सबूत आपके सामने हो और सच्चाई को दबाने का प्रयास किया गया तो आप क्या कहेंगे। जी हां! पुलिस और शासन की नकामियों की कहानी बताने के लिए क्राइम फाइल में आज प्रस्तुत की गई यह कहानी काफी है।

घटना का विवरण

जिला: प्रतापगढ़ … थाना-कंधई …. मुकदमा अपराध संख्या-250/12 …. धारा-363 आईपीसी

वादी-स्व. केवलामणि मिश्रा निवासी-ग्राम-पिपरी, पोस्ट सराय गनई, थाना कंधई, जिला प्रतापगढ़ (उ.प्र.)

आरोपी- कृष्ण प्रकाश मिश्रा (फर्जी शिक्षक एवं मुख्य आरोपी), हरिओंम मिश्रा (सह आरोपी)

अपहरित व्यक्ति- सुशील कुमार मिश्रा उर्फ छोटू
घटना का वर्ष- 2012

हाल स्थित- मुख्य आरोपी समेत 2 भेजे गए जेल (फिलहाल बेल पर बाहर)

बरामदगी:

8 साल से पुलिस सिर्फ कोशिश कर रही है
सुशील मिश्रा की गलती- फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्रा की खोली थी पोल,फर्जी मार्कशीट लगाकर हथियाई थी शिक्षक की नौकरी

कृष्ण प्रकाश मिश्रा को नौकरी से हाथ धोना पड़ा, शासन द्वारा मुकदमा भी दर्ज कराया गया

बड़ा सवाल- आखिर पुलिस छोटू की बरामदी करने में 8 साल के अलावा और कितने साल लगाएगी?
बड़ा आरोप- केस अनुसंधान करने के लिए स्थानीय थाने की पुलिस मांगती है रकम

विशेष बात- पीड़ित परिवार न्याय के लिए हर पुलिस अधिकारी के पास लगा चुका है गुहार, वादी मर गया लेकिन नहीं मिला न्याय

शुरू से ही लचर रहा मामले में पुलिस का रवैया

मामले का संक्षिप्त विवरण देखकर आप पुलिस की कार्यप्रणाली का अंदाजा लगा चुके हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि पुलिस द्वारा मामले में प्राथमिकी तक दर्ज करने में देरी की गई। पुलिस शुरू से ही आरोपियों की सुन रही थी। यह आप खुद समाचार के साथ दिए गए वीडियो में सुन सकते हैं। इसमें आप तत्कालीन एएसपी को यह कहते हुए सुन सकते हैं कि आरोपी पुलिस से यह कह रहे हैं सुशील कुमार मिश्रा उर्फ छोटू कहीं चले गए हैं। यानि आरोपी जो कह रहा है वह पुलिस सुन रही है लेकिन पीड़ित जो कह रहा है वह पुलिस सुन नहीं रही है।

यानि आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस केस की जांच करेगी। और हां! ASP साहब इतने सकपका गए मीडियो को देखकर कि अपहरित का नाम ठीक से नहीं ले पा रहे हैं। नाम कुछ है और ले कुछ और रहे हैं। बहरहाल अभी तक पुलिस खाली हाथ है। आरोपियों से रिश्वत लेकर पुलिस शुरू से ही मामले में लचर रवैया अपनाया। नतीजा अपहरित विक्लांग शख्स और आरटीआई कार्यकर्ता सुशील कुमार मिश्रा उर्फ छोटू आज भी गायब है और पुलिस सिर्फ प्रयास, जांच, ट्रेसिंग आदि आदि कर रही है।

मामले की जड़

पिपरी खालसा गांव के ही निवासी कृष्ण प्रकाश मिश्रा ने फर्जी मार्कशीट के दम पर शिक्षक की नौकरी हथिया ली। मामले में आरटीआई के तहत सुशील मिश्रा ने उसके कारनामों का खुलासा किया। मामले में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी एसटी हुसैन ने सारी जांच पड़ताल करने के बाद और बीटीसी की फर्जी मार्कशीट पाने के बाद फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्रा की शिक्षक पद से हमेसा के लिए सेवा समाप्ति कर दी। इतना ही नहीं कंधई थाने में फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्रा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 419 के तहत मुकदमा भी दर्ज करा दिया। मामले में कृष्ण प्रकाश मिश्रा बेल पर बाहर है और अन्य कार्रवाई शासन द्वारा प्रचलित है।

अब यही से शुरू होती है पुरी कहानी। अपनी नौकरी जाता देख फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्रा अपने भाई हरिओंम मिश्रा और अपने साथियों के साथ मिलकर सुशील कुमार मिश्रा उर्फ छोटू का अपहरण उस समय कर लेता है जब वह बीएसए कार्यालय से पैरवी करके लौट रहा था। मामले में छोटू द्वारा पहले ही कंधई थाने में अपने साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्रा के खिलाफ शिकायत पत्र दे रखी थी लेकिन पुलिस ने उसे इग्नोर कर दिया था। छोटू का अपहरण हो जाता है और इधर पुलिस आरोपियों से नोटों के बंडल लेकर चुपचाप बैठ जाती है।

मीडिया और अन्य लोगों का दवाब पड़ने पर पुलिस को घुटने टेकने पड़ते हैं और अपहरण के मामले में कृष्ण प्रकाश मिश्रा और हरिओंम मिश्रा के खिलाफ पुलिस को मुकदमा (मु. अ. सं. 250/12 धारा 363 थाना-कंधई) दर्ज करना पड़ता है। चूंकि, खाकी बिक चुकी रहती है तो आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती। सह आरोपी हरिओं मिश्रा को पुलिस तब गिरफ्तार करती है जब सुशील के भाई प्रदीप मिश्रा उसे पकड़ लेते हैं। यानि पुलिस द्वारा गिरफ्तार करना नहीं कहा जा सकता अब चूंकि आरोपी को परिजनों द्वारा पकड़ लिया गया था और मौके पर मीडिया थी तो पुलिस को हरिओंम मिश्रा को जेल भेजना पड़ता है।

अपहरणकांड के मुख्य आरोपी और फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्रा को पुलिस गिरफ्तार करने में लगभग 2 साल लगा देती है। इस बीच लगभग 1 साल जेल में रहने के बाद सह आरोपी हरिओंम मिश्रा को कोर्ट से जमानत मिलती है और दूसरी तरफ कृष्ण प्रकाश मिश्रा 420 के मामले में और अपहरण के मामले में जेल जाता है। लगभग एक साल फर्जी शिक्षक कृष्ण प्रकाश मिश्र जेल में रहता है।

आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस चार्जशीट दाखिल कर देती है और चार्जशीट में अपहरित व्यक्ति की बरामदगी भी शेष दिखाती है। जो कि पिछले 8 साल से अभी तक शेष नहीं है। वहीं दूसरी तरफ पीड़त परिवार हर पुलिस अधिकारी के दर पर न्याय के लिए गुहार लगाता रहा लेकिन खाकी शायद रिश्वत लेकर गूंगी, अंधी और बहरी बनी हुई है। हद तो तब हो जाती है जब केस अनुसंधान के लिए पुलिस द्वारा पीड़ित से ही रिश्वत मांगी जाती है।

क्या प्रतापगढ़ पुलिस का खुफिया तंत्र हो चुका है फेल

एक तरफ जब प्रतापगढ़ पुलिस फर्जी या असली एनकाउंटर करती है तो तमंचा, बाइक समेत बदमाश को पकड़ती है। अगर बदमाशों की गिरफ्तारी के मामले में पुलिस का खुफिया तंत्र काम कर रहा है और पुलिस के मुखबिर सटीक सूचना दे रहे हैं तो सुशील अपहरण कांड में उसी खुफिया तंत्र के हाथ पैर क्यों बंध जाते हैं? क्या प्रतापगढ़ पुलिस जानबूझकर पीड़ित की मदद नहीं कर रही? क्या जिले की पुलिस बिक गई है? क्या जिले की पुलिस का इकबाल खत्म हो गया है ? अगर नहीं तो पिछले 8 साल से वह आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद भी सुशील कुमार मिश्र उर्फ छोटू का पता लगाने में क्यों नाकाम रही है?

न्यायालय भी ‘कटघरे’ में

ऐसे और भी कई सवाल हैं जिनके जवाब ना तो पुलिस के पास है, ना कानून के पास है और हां ना ही न्यायालय के पास। न्यायालय को बीच में इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि आरोपियों को बेल तो दे दिया लेकिन उसी न्यायालय ने पुलिस से यह नहीं जानना चाहा कि आखिर सुशील कुमार मिश्र उर्फ छोटू का पता वह अभी तक क्यों नहीं लगा सकी है? सुशील के पिता और मुकदमा अपराध संख्या 250/12 में वादी केवलामणि मिश्रा का अब देहांत हो चुका है लेकिन कोर्ट में आज भी तारीख पर तारीख लग रही है और कोर्ट पुलिस से यह बिल्कुल नहीं पूछ रही है कि आखिर सुशील की रिकवरी वह क्यों नहीं कर पा रही है? पुलिस गलती कहां कर रही है? अगर यही हाल रहा तो आरोपी एक दिन सबूतों के अभाव में बरी हो जाएंगे और कोर्ट इस बात पर ध्यान ही नहीं देगी कि अपराध कभी हुआ था और एक शख्स आज भी गायब है।

गलती किसकी ?

सुशील अपहरण कांड में गलती किसकी है? क्या सुशील ने जो भ्रष्टाचार का खुलासा किया वह गलत था? या फर्जी शिक्षक कृष्ण कुमार मिश्रा? या फिर कंधई थाने की पुलिस और तत्कालीन विवेचक? या फिर शासन?

सुशील मिश्रा ने जो भी किया वह एक जागरूक नागरिक का धर्म था। सुशील ने ना सिर्फ सरकार के राजस्व की क्षति होने से बचाई बल्कि एक अपराधी को सलाखों के पीछे भी पहुंचाया और एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा भी किया। वहीं दूसरी तरफ सुशील के शिकायती पत्र पर कार्रवाई ना करके कंधई थाने की पुलिस ने बहुत बड़ी गलती की।

अगर थाने की पुलिस एक्टिव रहती तो सुशील आज अपने परिवार के बीच होते और भ्रष्टाचारी सलाखों के पीछे ही रहते। लेकिन चंद नोटों के खाति पुलिस ने खुद को बेच दिया और न्याय की जगह अन्याय को जीत दिलाई। ऐसे ही लोग खाकी के कलंक भी कहे जाते हैं। बहरहाल, सुशील के परिवार को अभी भी उम्मीद है कि कोई ना कोई ऐसा खाकीधारी जरूर आएगा जो उनकी फरियाद सुनेगा और आरोपियों को उनके असली अंजाम तक पहुंचाएगा।

हालांकि, ऐसा होता अभी दिख नहीं रहा है। सवाल अभी भी वही है-आकिर सुशील को बरामद करने में और कितने साल लगाएगी जिले की पुलिस?

तो ये थी क्राइम फाइल में आज की कहानी। अगर आप भी हैं ऐसे ही भ्रष्ट तंत्र के शिकार तो सीधे हमें बताएं। हम कोशिश करेंगे कि आपकी बात हुक्मरानों के कानों तक पहुचे।

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ए. के. शुक्लाhttp://www.khabar4india.com
एके शुक्ला लगभग 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं और खबर4इंडिया, खबर4यूपी और भड़ास4नेता के फाउंडर और संपादक हैं। शुक्ला कई समाचार चैनलों में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। शुक्ला बेखौफ और परिणाम की चिंता किए बिना जन सरोकार से जुड़ी पत्रकारिता करते रहे हैं। शुक्ला से कोई भी बेहिचक मोबाइल नंबर 9990486338 पर सम्पर्क कर सकता है।

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